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शनिवार, 18 जून 2016

परंपरागत सब्जियों से हटकर यह चमत्कारिक सब्जियां अवश्य खाएँ !

आप भरपूर आलू और टमाटर खाते हैं इसके अलावा पत्ता गोभी, फूल गोभी, गिलकी, तौरई, भिंडी, लौकी, बैंगन, कद्दू, करेला, पालक, मैथी, अरबी, सरसों का साग, सेम फली (बल्लोर), मटर, बोड़ा (लोभिया या चवला फली), ग्वार फली, सहजन या सुरजने की फली, टिंडा, शिमला मिर्च, भावनगरी मिर्च, शलजम, कटहल, शकरकंद (रतालू) आदि का सेवन करते ही रहे हैं !

उक्त का सेवन करने के साथ ही आपने प्याज, खीरा, ककड़ी, हरी या लालमिर्च, मूली, धनिया, अदरक, लहसुन, नींबू, आंवला, गाजर, मक्कई, कच्चा आम (केरी) आदि का भी खूब इस्तेमाल किया है !

हम यह भी जानते हैं कि आपने सेंव की सब्जी, चने की भाजी, बेसन, रायता, कढ़ी और पनीर पर भी खूब हाथ साफ किए हैं, पर हम आपको तोटाकुरा, सोया, हरी अजवाइन, हरे प्याज की घास, अरबी का पत्ता, अरबी जड़, पेठा, ब्रोकली, गांठ गोभी, परवल, कच्चे केले की सब्जी, कच्चे केले का तना, कच्चे केले का फूल, पुदीना, धनिया, करी पत्ता, फ्रेंच बीन्स, ग्वार फली, सहजन की फली, पेठा, कमल ककड़ी, सुरतीकंद, अंवलामकाई और मूंगे की फली के बारे में बताने वाले नहीं हैं लेकिन हम आपको उपरोक्त से अलग ऐसी सब्जियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपने शायद ही कभी खाई होगी !

आपके लिए हम ढूंढकर लाए हैं ऐसी ही कुछ चमत्कारिक सब्जियों की जानकारी जिन्हें जानकर आप रह जाएंगे हैरान !

कोझियारी भाजी : कोझियारी भाजी की भाजी साल में एक बार जरूर खाएं ! इससे खाने से हर तरह के रोग दूर हो जाते हैं ! अधिकतर आदिवासी इस भाजी को खाते हैं ! माना जाता है कि इसे खाने वाला कभी बीमार नहीं पड़ता ! छत्तीसगढ़ के बैगा आदिवासी लोग इस भाजी को खाकर हमेशा स्वस्थ और तंदुरुस्त बने रहते हैं ! बैगा आदिवासी मानते हैं कि जंगलों में पाई जाने वाली कोझियारी भाजी को साल में एक बार जरूर खाना चाहिए ! कोझियारी भाजी यानी जंगल में होने वाली सफेद मूसली का पत्ता ! ये सभी जानते हैं कि सफेद मूसली शक्तिवर्धक औषधि है !

कुंदरु (COCCINIA GRANDIS (Gherkins) : कुंदरू का नाम तो आपने कम ही सुना होगा ! कुंदरु को टिंडॉरा नाम से भी जाना जाता है ! माना जाता है कि 100 ग्राम कुंदरू में 93.5 ग्राम पानी, 1.2 ग्राम प्रोटीन, 18 के. कैलोरी ऊर्जा, 40 मिलीग्राम कैल्शियम, 3.1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 30 मिलीग्राम पोटैशियम, 1.6 ग्राम फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं ! कहते है कि इसमें बीटा कैरोटिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है ! कुंदरू के पत्ते और फूल भी उतने ही गुणकारी हैं जितना इसका फल है ! हाल में एक शोध में यह माना गया है कि खाने में रोज 50 ग्राम कुंदरू का सेवन करने से हाई बीपी के मरीजों को आराम मिलता है !

चौलाई का साग (amaranth) : चौलाई का साग तो आपने खाया ही होगा लेकिन बहुत कम, कभी-कभार ! यह सब्जी बहुत ही आसानी से मिल जाती है ! यह हरी पत्तेदार सब्जी है जिसके डंठल और पत्तों में प्रोटीन, विटामिन ए और खनिज की प्रचुर मात्रा होती है ! चौलाई में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-ए, मिनरल्स और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं !

इस सब्जी को खाने से आपके पेट और कब्ज संबंधी किसी भी प्रकार के रोग में लाभ मिलेगा ! पेट के विभिन्न रोगों से छुटकारा पाने के लिए सुबह-शाम चौलाई का रस पीने से भी लाभ मिलता है ! चौलाई की सब्जी का नियमित सेवन करने से वात, रक्त व त्वचा विकार दूर होते हैं !

चौलाई को तंदुलीय भी कहते हैं ! संस्कृत में मेघनाथ, मराठी और गुजराती में तांदल्जा, बंगाली में चप्तनिया, तमिल में कपिकिरी, तेलुगु में मोलाकुरा, फारसी में सुपेजमर्ज, अंग्रेजी में Prickly Amaranthus कहते हैं ! इसका वानस्पतिक नाम Amaranthus spinosus है !

चौलाई दो तरह की होती है- एक सामान्य पत्तों वाली तथा दूसरी लाल पत्तों वाली ! कटेली चौलाई तिनछठ के व्रत में खोजी जाती है ! भादौ की कृष्ण पक्ष की षष्ठी को यह व्रत होता है ! चौलाई को खाने से आंतरिक रक्तस्राव बंद हो जाता है ! यह सब्जी खूनी बवासीर, चर्मरोग, गर्भ गिरना, पथरी रोग और पेशाब में जलन जैसे रोग में बहुत ही लाभदायक सि‍द्ध हुई है !

खुम्ब (Mushroom) : इसे हिन्दी में खुम्ब और वर्तमान में इस पौधे को मशरूम कहा जाता है ! मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के जंगलों में यह स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी सैकड़ों सालों से बैगा आदिवासी लोग खाते आ रहे हैं ! आदिवासी लोग इसे चिरको पिहरी कहते हैं !

भारत के कुछ इलाकों में ऐसी मान्यता है कि यह कुत्तों के मूत्र त्याग के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है, लेकिन यह बिलकुल गलत धारणा है इसीलिए कई लोग इसे कुकुरमुत्ता कहते हैं ! स्वाद में यह आलू की तरह ही लगती है लेकिन इसमें भरपूर शारीरिक ताकत पैदा करने की क्षमता होती है ! इसके साथ ही कई और भी सब्जियां हैं जैसे पुट्पुरा, बोड़ा, पुटू इनके अलग-अलग इलाके में अलग-अलग



Posted by nlparmar

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